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छायाओं का जंगल

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 एक घना जंगल था जहाँ हाती और हिरण बचपन से साथ रहते थे। लेकिन उस जंगल के बारे में एक डरावनी दास्तान मशहूर थी—रात को कोई भी वहाँ रुकता नहीं, क्योंकि “छायाओं का साया” लोगों को गायब कर देता था। एक दिन कवि और राज ने हिम्मत की और जंगल घूमने निकल पड़े। रास्ते में उनकी मुलाकात हाती और हिरण से हुई। दोनों जानवर उन्हें देखकर अजीब तरह से उदास लग रहे थे। हिरण बोला, “मत रुकना यहाँ, रात ढलने से पहले निकल जाओ।” लेकिन कवि जिद करने लगा, “हम डरने वाले नहीं।” रात घिरते ही पेड़ों से फुसफुसाहटें आने लगीं। हाती अचानक बेचैन हो उठा, उसकी आँखें लाल हो गईं और वह गर्जना करने लगा। राज ने देखा कि हाती के शरीर पर काली छायाएँ चिपकी थीं। अचानक हिरण भी चीखने लगा और उसकी परछाई ज़मीन से उठकर जीवित होने लगी। कवि और राज भागे, मगर जंगल जैसे उनका पीछा कर रहा था। हवा में गूंजती आवाज आई—“यह जंगल अब तुम्हें अपना लेगा…” सुबह होने तक राज अकेला बचा। कवि का नाम हमेशा के लिए जंगल की छायाओं में गुम हो गया।